Jane Goodall

Jane Goodall biography in hindi

जेन गुडॉल की जीवनी

परिचय

  • जेन गुडॉल ब्रिटिश primatologist, ethologist और arthropologist है |
  • जेन गुडॉल एक प्रकृति प्रेमी, जीवो के प्रति जागरूक शोधकर्ता, शिक्षाविद, वैज्ञानिक है जीवो के संरक्षण विकास एवम विश्व स्तर पर उनके लिए कार्य करने वाली महिला शोधकर्ता है |
  • जेन ने ही पहली बार चिम्पांजी सबसे निकट से अध्ययन किया है, जेन एक कुशल शोधकर्ता वैज्ञानिक प्रोफेसर और जीवो के संरक्षण का कार्य करने वाली महिला है, जेन ने तंजानिया में काफी वर्षो तक चिम्पांजी के साथ समय बिताया उनको अवलोकन किया और काफी नजदीक से उनके जीवन का अध्ययन किया, जेन यूएन की शांति दूत भी रह चुकी है, जेन ने jane Goodall institute की स्थापन भी की ताकि वहा चिम्पांजी और अन्य वन्य जीवों का अध्ययन किया जा सके, जेन एक सफल महिला वन्य जीव संरक्षक कार्यकर्ता है।

जीवन

आरंभिक जीवन 

  • जेन गोडाल का जन्म लंदन में हुआ था, उनके पिता  एक इंजीनियर और रेस कार ड्राइवर थे, माता एक सफल उपन्यास कार थी |
  • गोडॉल बचपन से काफी उत्सुक, जिज्ञासु, और प्रकृति से लगाव रखने वाली इंसान थी उन्हे पशु पक्षियों में विशेष रुचि रखती थी, जेन गोडॉल जब छोटी थी तब उनके  पिता ने एक कॉटन से बनी एक चिम्पांजी दी थी, गुडॉल को उस खिलवने से काफी लगवा हो गया जेन ने उसका नाम जुबली रखा था, एक बार कि बात है जेन जब 5 वर्ष की थी तब घर वालो को लगा वो कही खो गई है काफी खोज बिन करने के बाद jane मिली वो एक मुर्गी को अंडे देते काफी ध्यान से देख रही थी, घर वाले ये दृश्य देखकर काकी आश्चर्य चकित हो गए थे, जेन के पिता को वर्ल्ड वार सेकंड छिड़ जाने के कारण फ्रांस जाना पड़ा जिससे जेन अपने पिता से दूर रहने लगी, जेन अपने मां के बेहद करीब थी उनकी मां एक सफल उपन्यास करा थी वो जेन को हर कदम पर प्रोत्साहित करती थी जेन की मां ने एक बार जेन से कहा,,,
Jane, if you really want something and you work hard take advantage of the opportunities and never give up you will find a way..
  • जेन गुडॉल का मन पढ़ने में  तो लगता था लेकिन वो स्कूल के दिन चर्या से काफी प्रभावित नही थी उन्हे स्कूल के वही रोज के कार्यो से काफी चीड़ थी, जेन ने कहा था

Woke up to be faced by yet another dreary day of torture at that gloomy place of discipline and learning, where one is stuffed with “education” from day’s dawn to day’s eve.             

फिर भी जेन गुडॉल ने  पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित किया जेन को बायोलॉजी और इंग्लिश में काफी रुचि थी, स्कूल के दिनो मे जेन को essay निबंध लेखन में 2 पुरस्कार मिले थे |

जीवन संघर्ष

जेन गुडॉल काफी छोटी थी तभी उनके माता पिता का तलाक हो गया, जेन पर इसका काफ़ी गहरा प्रभाव पड़ा वो मां के साथ नानी के यहां रहने लगी bournemouth  south coast of  England |  जेन  ने कई सारी किताबो  को पढ़ा उन किताबो के पढ़ने के बाद जेन काफी प्रभावित हुई जैसे टार्जन, द जंगल बुक और भी कई सारी किताबें उन्हें वन्य जीव के और नजदीक लाती गई  ये किताबे  जेन जब थोड़ी बड़ी हुई तो वो अफ्रीका जाना चाहती थी उनके लिए जेन ने कई सारी छोटी छोटी नौकरियां भी की ताकि पैसा इकठ्ठा कर सके, 1953 में जेन अपनी मां के कहने पर London’s queens secretarial college से स्नातक की पढ़ाई पूरी की जेन ने अपने अफ्रीका जाना का सपना नही छोड़ा था ।1955 में  जेन को एक पत्र मिला केन्या जाने के लिए, जेन इसी दिन का इंतजार कर रही थी, मार्च 1957 में तीन हफ्ते की यात्रा के बाद जेन केन्या पहुंच गई, वहा जेन ने नारोबी में एक काम भी ढूंढ लिया अपने लिए, वहा उनकी जेन की मुलाकात ब्रिटन के जीवश्म वैज्ञानिक लुइस लिके (Louis Leakey) से हुई जो नेशनल हिस्ट्री म्यूजियम में क्यूरेटर थे लुइस जो डार्विन की थ्योरी पर काम कर रहे थे, उनको एक योग्य कुशल, सहायक की तलाश थी,जो वन्य जीवों का अध्ययन कर सके जेन से मिलकर उन्हें लगा ये सही व्यक्ति है उनके शोध के लिए लुइस ने जैन को सेक्रेटरी नियुक्त कर लिया और जेन को गोम्बे स्ट्रीम रिजर्व (gombe stream reserve) तंजानिया में 1960 में भेज दिया जहा जेन को चिम्पांजी और apes को काफी नजदीक से अध्ययन करना था, जेन ने PhD पूरी की 1965 में कैंब्रिज यूनिवर्सिटी से, गोम्बे में कुछ दिन जेन की मां भी उनके साथ रही वहा जेन ने वन्य जीवों खास कर  चिम्पांजी का गहनता और नजदीक से अनुभव अध्ययन किया। जेन ने एक चिम्पांजी जिसका नाम david greybeard रखा था उसके  काफी नजदीक  हो गई जेन चिम्पांजी का काफी बारीकी से अवलोकन करने लागी थी वोउनके द्वारा किए गए हर व्यवहार पर अपनी नजर जमाए हुए थी, जेन ने ये देखाकि चिम्पांजी भी यंत्र बनाना और मीट खाना जैसे कई सारी ऐसी क्रिया करते है जिसे अब तक बस ये माना जता था की मनुष्य ही यंत्र निर्माण कर सकता है जेन के शोध ने मनुष्यो के कई सारे मिथक को दूर किया took making and meat eating

  • जेन के काम पर पूरे विश्व की नजर पड़ी तो नेशनल geographic ने1962 अपने एक फोटोग्राफर baron hugo van lawick को जेन के कार्यों को निरीक्षण करने और फिल्माने के लिए गोम्बे भेजा,1964में जेन गुडॉल और baron hugovon lawick ने शादी कर ली।

उपलब्धियां/योगदान

जेन ने अपने गोम्बे के पहले दिन के अनुभव को साझा करते हुआ कहा है कि

Looking up from the shore to the forest hearing the apes and the birds,and smelling the plant and thinking it was very very unreal

jane Goodall

जेन गुडॉल पहली ऐसी व्यक्ति है जिन्होंने पहली बार चिम्पांजी को इतने नज़दीक से जाना था, उनका अवलोकन तथा अध्ययन किया था, जेन ने पहली बार ये बताए कि

  • चिम्पांजी भी यंत्र निर्माण और उसको प्रयोग करते है, चिम्पांजी की भी अपनी भाषा होती है वो लगभग 20तरह के संकेतो में एक दूसरे से संपर्क करते है
  • चिम्पांजी भी एक दूसरे के साथ अपने क्षेत्रों के लिए युद्ध और आक्रामक रुख अपनाते है
  • जीवो की अपनी प्रेम प्रकट करने की भाषा होती है
  • वो अपने समाज का निर्धारण एवम संरक्षण भी करते है चिम्पांजी इंसानों की तरह चतुर, सामाजिक कार्यकर्ता है

जेन ने कई सारी ऐसी बातों और व्यवहारों को लोगो के सामने प्रस्तुत किया जिससे तत्कालीन समय में मनुष्यो के ही लक्षण माने जाते थे, जेन के शोध ने मानव और चिमापंजी में अनेकों समानता और घनिष्ठ सम्बन्ध का परिदृश्य दुनिया के सामने रखा,

  • 1971 में जेन ने अपने एक पुस्तक प्रकाशित की –    “In the shadow of man
  • जेन ने कई सारी किताबें लिखी, जेन स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर भी रही, जेन विस्टिंग प्रोफेसरों थी जूलॉजी की universty of dar sa salaam तंजीनिया में
  • 1977 में जेन गुडॉल ने jane Goodall institute की स्थापन की, चिम्पांजी के संरक्षण एवम उनके अध्यन के लिए

निष्कर्ष

जेन गुडॉल एक प्रकृति प्रेमी, संवेदन शील,स्थिर एवम वन्य जीवों के प्रति से परिपूर्ण शोधकर्ता, वैज्ञानिक, प्रोफेसर है, जेन ने चिम्पांजी के संरक्षण एवम, उनके विकास पर काफी प्रभावपूर्ण कार्य किए है, वो जीवो के संरक्षण उनको मानव द्वारा तस्करी एवम उनके शिकार पर प्रतिबंध लगाने के लिए कई सारी संस्थान खोली और खुद भी सक्रिय रूप से कार्य किया, चिंपाजी मानव के कुछ हद तक समतुल्य ही है  चिंपाजी भी एक कुशल नेतृत्व कर्ता, सहायक, सामाजिक समझ को व्यक्त करने वाले जीव है, मानव के सुचारू समग्र विकास के लिए जीवो का होना उतना ही आवश्यक है जितना मानव का स्वम , वन्य जीवों का संरक्षण एवम उनके प्रति मानव के व्यवहार में उचित परिवर्तन नितांत आवश्यकता एवम अपरिहार्य है

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1,791 thoughts on “Jane Goodall

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